mandla निवास में प्यास पर राजनीति भारी

टंकियां बनीं, पाइपलाइन बिछी, करोड़ों खर्च

mandla निवास में पानी की समस्या अब केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बन चुकी है। नगर परिषद क्षेत्र में बीते दो दशकों के दौरान पानी की व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।

नगर में अब तक छह पानी की टंकियां और एक फिल्टर प्लांट बनाया जा चुका है, जबकि एक अन्य फिल्टर प्लांट निर्माणाधीन है इनमें से केवल एक फिल्टर प्लांट और एक पानी की टंकी ही सफलतापूर्वक काम कर रही है। दो पानी की टंकियां तो निर्माण के दौरान ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। परीक्षण के समय इनमें रिसाव सामने आ गया शेष तीन नवीन टंकियों की स्थिति कैसी है कोई ही जानता।

mandla जमीन के नीचे घटता जलस्तर, ऊपर खाली दावे

नगर परिषद में आज भी धरती का सीना चीरकर लगातार पानी निकाला जा रहा है करीब एक दर्जन बोरवेल के भरोसे लोगों तक पानी पहुंचाने की कोशिश हो रही है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे जल संकट भयावह रूप लेने लगता है। लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल सका। हर चुनाव में पानी सबसे बड़ा मुद्दा बनता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भी सूख जाते हैं।

नगर और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक दशक पहले तक 300 फीट की गहराई पर ही पानी उपलब्ध हो जाता था, लेकिन वर्तमान में पानी के लिए 500 से 600 फीट अथवा उससे अधिक गहराई तक बोरिंग करनी पड़ रही है।  बढ़ती आबादी के अनुपात में जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन की प्रभावी एवं दीर्घकालिक योजनाएं नहीं बनाई गईं। परिणामस्वरूप जल संकट धीरे-धीरे गहराता गया।

मझगांव पाइपलाइन परियोजना राजनीति की भेंट

किसी भी परियोजना के शुरू होने से पहले दोनों ही दलों और स्थानीय नेताओं की टांग खींच प्रतियोगिता क्षेत्र के लिए कोढ़ में खज का काम करती आ रही है। मझगांव जलाशय परियोजना की बात करें तो इसी खींचतान ने ही जनता को प्यासा कर रखा है। मझगांव से निवास तक पाइपलाइन परियोजना एक दशक पहले स्वीकृत हुई थी। उस समय नगरीय निकाय में भाजपा की सत्ता थी।लेकिन जैसे ही कांग्रेस सत्ता में आई, परियोजना की रफ्तार थम गई। कांग्रेस सांसद कुलस्ते पर आरोप लगाती रही कि मंझगाव पाइप लाइन परियोजना कार्य को करने वाली कंपनी पर दवाब बना कर कार्य नहीं करने दिया है। उधर सांसद कुलस्ते कहते रहे कि कंपनी कार्य इसलिए नहीं कर रही क्योंकि बांध में पानी नहीं है। 

हालांकि निकाय चुनाव में भाजपा सत्ता में जैसे ही आती है वही कंपनी अचानक सक्रिय हो गई। वर्षों से अटकी परियोजना शुरू होते ही अचानक मझगांव पंचायत में पानी देने का विरोध शुरू हुआ पेसा एक्ट के तहत प्रस्ताव किया गया कि मझगांव जलाशय से पानी नहीं दिया जाएगा। अब आरोप कांग्रेस पर आया कि उनके द्वारा रोक लगवा दिया गया है।

निवास क्षेत्र की जनता आज भी नियमित पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रही है।हर कुछ वर्षों में नई टंकी, नया फिल्टर प्लांट और नई घोषणा जरूर सामने आती है, लेकिन जमीन पर हालात नहीं बदलते। अच्छा होगा मिल कर स्थाई समाधान खोजा जाए बडी परियोजनाओं में राजनीति न कर सहयोग किया जाए तभी कुछ सुखद परिणाम सामने आ पाएंगे।

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पानी की राजनीति

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