mandla niwas गुरुवार को ओबीसी महासभा ने आरक्षण और जनगणना को लेकर राष्ट्रपति, राज्यपाल के नाम से अनुविभागीय दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए राज्य और केंद्र सरकार के व्दारा ओबीसी केटेगरी में आने वालीं जातीयो को नजरंदाज करने का आरोप लगा।
मंडला जिले के निवास में ओबीसी महासभा ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर मांग की है कि महासभा ने मांग की कि जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत किए जाने संबंधी आदेश पर संवैधानिक प्रावधानों के तहत रोक लगाने की मांग पर विचार किया जाए। साथ ही, ओबीसी वर्ग को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी उठाई गई।
जनगणना में सही गणना स्पष्ट पहचान देने की मांग
राष्ट्रपति के नाम ग्यारह बिंदुओं में सौपे ज्ञापन में ओबीसी वर्ग को जनगणना 2027 प्रश्नावली में एसटीएससी की तरह प्रथक से स्पष्ट कालम दिया जाए , ओबीसी की कुल जनसंख्या और इस वर्ग में आने वालीं प्रत्येक जातीय की कुल जनसंख्या के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, इस वर्ग में आने वालीं जातीयों की समाजिक आर्थिक स्थिति को सार्वजनिक किया जाए , जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार आरक्षण और योजनाओं में लाभ दिए जाने की मांग की गई है।
ओबीसी महासभा का कहना है कि यदि 2019 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा 27 प्रतिशत आरक्षण अध्यादेश में कोई कमी तो उसमें सुधार क्यों नहीं किया गया सिर्फ पुरानी सरकार पर दोष मढ़ना ठीक नहीं। अगर राज्य सरकार व्दारा प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता तो राज्य व्यापी प्रदर्शन किया जाएगा
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