बुधवार को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 200 जोड़ों ने सात फेरों के बाद नवजीवन में प्रवेश किया कार्यक्रम निवास के राजा शंकरशाह रघुनाथ शाह मैदान में आयोजन किया गया था। जिसमें निवास नारायणगंज बीजाडांडी के वर वधु शामिल थे।
विवाह कार्यक्रम में जंहा एक तरफ ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण पढा जा रहा था तो दूसरी तरफ पूनैम (गौडी मंत्र) का उच्चारण के साथ नवयुगलों ने सात जन्मों के बंधन की रस्मो को पूरा किया नवविवाहित जोड़ों को 49 हजार राशी का चैक दिया गया, भीषण गर्मी के बीच हो रहे इस समरोह में विधायक चैन सिंह बरकडे ने मांग कि ” इस तरह के आयोजन जनवरी माह में किया जाना चाहिए ताकि गर्मी और अन्य परेशानीयो से बचा जा सके।
जोड़ों की संख्या तय करने पर दिखी नाराजगी
नारायणगंज और बीजाडांडी जनपद के जनप्रतिनिधियों ने मंच से मांग रखी कि इतनी बड़ी योजना का फायदा सभी उठाना चाहते है किन्तु टारगेट दिए जाने के कारण बहुत सारे लोग फायदा नहीं उठा सके सबसे अधिक परेशानी सरपंच सचिवों को आई है। दूसरी तरफ निवास जनपद क्षेत्र अंतर्गत पांच पंचायतों के जोड़ों के शामिल न होने से सरपंचों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था। कार्यक्रम के दौरान सरपंचों की बैठक स्थानीय विश्राम गृह में चल रही थी। हालांकि मंच में सासद फग्गन सिंह कुलस्ते के व्दारा अगले विवाहिक कार्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई है।
आमतौर पर विवाह कार्यक्रम में जब तक फूफा, दामाद न रूठें कुछ विवाद न हो तब तक शादी का आंनद नहीं निकलता यही सब चटकारे लेने वाली बातें होती रही कभी खाना को लेकर रूठने मनाने का दौर चला तो कभी कोई नाराज हुआ। मज़ेदार नज़ारा तब बना जब सांसद कार्यक्रम से मंडला की ओर रवाना हुए और पीछे से अधिकारीयों का ध्यान ‘मुख्य मुद्दे’—यानी पकवान—पर केंद्रित हो गया। इसी बीच खाने को लेकर हल्की-फुल्की तकरार भी हुई, लेकिन अधिकारियों की एकाग्रता इतनी मजबूत थी कि न विवाद डिगा पाया, न प्लेट।
आख़िरकार, रूठने-मनाने, तकरार और स्वाद के इस संगम के बीच शादी पूरी शालीनता (और पेटपूजा) के साथ संपन्न हो गई—क्योंकि असली सफलता वही है, जहाँ मेहमानों के साथ-साथ किस्से भी भरपेट मिलें।
राजनीति में ऐसा ही निशाना साधा जाता है
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