kanha में बाघों की मौत पर बवाल: पत्रकारों का धरना शुरू

kanha नेशनल पार्क में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने जहां वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है, वहीं अब यह मामला सड़कों तक पहुंच गया है। प्रबंधन की कथित लापरवाही और जानकारी छिपाने के विरोध में पत्रकारों ने आंदोलन शुरू कर दिया है।

मंगलवार को मंडला जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट रोड पर पत्रकारों ने वन विभाग और कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन के खिलाफ 14 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन की शुरुआत की। पत्रकारों का आरोप है कि लंबे समय से प्रबंधन न सिर्फ लापरवाही बरत रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर मीडिया को गलत जानकारी दे रहा है।

kanha में एक महीने में 7 बाघों की मौत

बीते एक माह में 7 बाघों की मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मादा बाघ और उसके चार शावकों सहित एक अन्य बाघ की मौत अप्रैल माह में हुई है। मई माह के पहले सप्ताह में 4 वर्षीय बाघ का शव मिलने से फिर हड़कंप मच गया है।  लगातार बाघों की मौतों के बाद प्रबंधन ने चुप्पी तोडी और अब स्वीकार किया है कि अधिकांश बाघों की मौत केनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है जबकि सोमवार को मिले बाघ डिगडोला की मौत का कारण आपसी संघर्ष है। 

प्रबंधन सफाई देते हुए कह रहा है की कुत्तों का वैक्सीनेशन शुरू किया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतनी बड़ी घटना के बाद ही प्रबंधन की नींद क्यों टूटी? क्या पहले यह जानकारी नहीं थी कि बाघ पार्क की सीमाओं से बाहर भी आते-जाते हैं? शवों का खराब अवस्था में मिलना बताता है कि निगरानी कागजों में हो रही है। इस नेशनल पार्क को सरकार से अच्छा खासा बजट प्राप्त होता है इसके बावजूद खराब व्यवस्था ने बेड़ा गर्ग कर रखा है। 
मप्र विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया गया है कि पार्क को विभिन्न मदों के तहत वर्ष 22-23 में 27,70,23440 रूपये वर्ष 23-24 में 39,45,20229 रूपये और 24-25 में 39,74,29328 रूपये प्राप्त हुए हैं।

हैरानी की बात यह है कि जिस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध होना चाहिए था, उस पर पत्रकारों को आंदोलन की कमान संभालनी पड़ रही है। पत्रकारों की प्रमुख मांग है कि

पत्रकारों को गलत जानकारी देने पर कान्हा प्रबंधन पर एफआईआर दर्ज कराई जावें , पार्क में जो भी पक्के निर्माण कार्य जैसे हॉटल रेस्टहॉउस को नष्ट किया जाये ,कान्हा के तीनों गेटो के आस पास जो अतिक्रमण किया गया है उसे तत्काल हटाया जावे ,कान्हा पार्क अंतर्गत रिसोर्ट, हॉटलों को मांसाहार मुक्त रखा जाए, रिसोर्टों में डीजे एवं आतिशबाजी और शादी विवाह पार्टी प्रतिबंधित किया जावे, कान्हा प्रबंधन का पूरा स्टाफ बदला जावे, विगत पांच वर्षो में जो बजट आया है उसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए,  ज

कान्हा प्रबंधन द्वारा प्रचार प्रसार में विगत पांच वर्षो में कितनी राशि खर्च कि गई है जानकारी सार्वजनिक किया जाए।

 पार्क के अंदर पक्के निर्माण की जानकारी सार्वजनिक हो ,  पार्क के अंदर जितने एनजीओ है उन्हें प्रतिबंधित किया जाये,प्रतिदिन जंगल सफारी में जो जिप्सियां जाती हैं उनकी जानकारी सार्वजनिक करें, कान्हा पार्क क्षेत्र पर प्लास्टिक डिस्पोजल प्रतिबंधित किया जाये।

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