एक करोड़ से अधिक के बैक गबन मामले में चार लोगों को दस दस साल की सजा

मध्य प्रदेश के मंडला में विशेष न्यायालय ने महाराजपुर बचत बैंक में हुए गबन के मामले में चार आरोपियों को 10:-10 साल की सजा का फैसला सुनाया है पूरा मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति केहरपुर के बचत बैंक का है जिसमें बैंक के मैनेजर कैसियर एवं सहकारिता निरीक्षक सहित 4 लोगों पर एक करोड़ 27 लाख से अधिक का गबन का आरोप लगा था विशेष न्यायालय ने चारों आरोपियों को धारा 120 बी 409 420 487 468 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(२) दो में दोषी पाया है

बैक गबन मामले में चार लोगों को दस दस साल की सजा

जिला अभियोजन अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि बैंक प्रबंधक डीआर कबीरे, विनोद कुमार जैन कैशियर संतोष उर्फ बंटी पांडे द्वारा बचत बैंक की राशि को फर्जी बिल बाउचर के माध्यम से गवन कर बैंक को एक करोड़ 27 लाख 91000 ₹66 की क्षति पहुंचाई गई उपरोक्त गबन के संबंध में शिकायत की जांच करने के उपरांत राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो भोपाल मैं दिनांक 26_7 _2011 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के उपरांत उन्हें कार्यवाही हेतु जबलपुर को भेजी गई थी जबलपुर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो इकाई व्दारा इस मामले की जांच कराई गई जांच में पाया गया कि अभियुक्त गण द्वारा वर्ष 2007 से वर्ष 2009 के बीच बिल और फर्जी चेकों के माध्यम से आदिम जाति सेवा सहकारी समिति द्वारा संचालित बैंक कृषि शाखा मंडला से राशि का आहरण किया गया और उस राशि को उसी दिनांक को बचत बैंक महाराजपुर की शाखा में जमा नहीं कराया गया केसबुक में भी इन राशियों की प्रविष्टि देर से की गई आरोपियों द्वारा कई पंचायतों के खातों से भी गलत तरीके से राशि निकाली गई।

मृगनयनी बिल्डिंग मैटरियल सप्लायर रितेश राय के बचत बैंक के खाता क्रमांक 1628 मैं अलग अलग तारीखों में अवैध रूप से राशि जमा की गई और निकाली गई जांच कार्यवाही के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि सहकारिता निरीक्षक अभियुक्त विश्वनाथ मेश्राम द्वारा वर्ष 2007 2008 की अवधि में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केहरपुरा महाराजपुर का ऑडिट किया गया था परंतु उसके व्दारा गड़बड़ी को उजागर न कर अभियुक्त संतोष पांडे डीआर कबीरे एवं वीके जैन द्वारा की गई शासकीय धनराशि के दुरुपयोग को छुपाया गया। जांच के बाद चारों ही आरोपियों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर भ्रष्टाचार अधिनियम मंडला के विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया जिस पर माननीय न्यायालय द्वारा चारों ही आरोपियों को दोषी पाते हुए 10: 10 साल की सजा और ₹800000 का जुर्माना लगाया गया है

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