मंडला जिले के निवास में बुधवार को ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जमीन के हस्तांतरण पर आपत्ति जताई गई है।
तहसील कार्यालय निवास द्वारा दिनांक 4-12-25 के पत्र अनुसार बनार गांव में मौजूद पांच भूखंडों को बनने वाले बसनिया पुनर्वास हेतु दावा आपत्ति 18 दिसम्बर 25 तक मांगा गया था ,लेकिन ग्रामीणों को समय पर जानकारी नहीं मिलने के कारण नियत तिथि से तकरीबन तीन माह बाद ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराते हुये यह आरोप लगाया है कि हमें दो दिन पूर्व ही ग्राम पंचायत के मोबेलाइजर के माध्यम से जानकारी मिली है।
ग्रामीण ने बताया कि गांव के उक्त पांच भूखंडों में तीस हेक्टेयर जमीन आती है जिसका ग्रामवासी वर्षों से समुदायिक इस्तेमाल करते आ रहे हैं अतः किसी अन्य कार्य हेतु किसी संस्था को यह जमीन आवंटित करने से ग्रामवासियों को परेशानी होगी।आपत्ति दर्ज कराने आए ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में पैसा एक्ट लागू है इसलिए बिना ग्राम पंचायत की सहमति के जमीन आवंटित नहीं की जा सकती है।
मालूम हो कि जिले से गुजर रही नर्मदा नदी (बसनिया ग्राम) में बांध प्रस्तावित है जिसमें सैकड़ों गांवों के साथ साथ वन विभाग की जमीन भी डूबने वाली है राजस्व विभाग व्दारा उक्त वन भूमि के बदले में 55 अलग अलग गांवों के पास मौजूद रजस्व भूमि को चिन्हांकित किया है जिसको लेकर दावा आपत्ति मांगी जा रही है। दूसरे तरफ पुराने वन क्षेत्र और गांवों के डूबने का विरोध भी लगातार जारी है।
नायाब तहसीलदार आलोक सोनी का कहना है कि राजस्व भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित करने हेतु दावा आपत्ति मांगा गया था ग्रामीणों को लगा कि गांव में बसनिया विस्थापियों को बसाए जाने हेतु भूमि आवंटित करने की कर्रवाई की जा रही है, इस आशय का ज्ञापन मुझे दिया गया है जिसे संबंधित उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया जायेगा।

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