Mandla में एक बार फिर एक शासकीय स्कूल का वीडियो वायरल हुआ है वीडियो देखकर लग रहा है कि कक्षा रील स्टूडियो बनी हुई है और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार इत्मिनान से कुंभकर्णी नींद में सोय हुए हैं। जिसके कारण शासकीय स्कूलों की साख पर बट्टा लग रहा है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर और अनुशासन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के मवई विकासखंड के घोंटा पीएम श्री स्कूल शासकीय स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूल की बच्चियां कक्षा के अंदर परंपरागत शादी का रूपांतरण (एक्टिंग/नाटक) करती नजर आ रही हैं। वीडियो में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह गायब दिखता है और कक्षा किसी मनोरंजन मंच में तब्दील नजर आ रही है।
Mandla शिक्षा व्यवस्था की लगातार खुल रही कलई
महज एक सप्ताह में जिले के दो शासकीय स्कूलों के वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। करीब एक सप्ताह पहले एक अन्य शासकीय स्कूल से भी वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक शिक्षक कथित तौर पर शराब के नशे में बच्चों को “तुम तो ठहरे परदेसी” गाना सिखाता दिखाई दिया था। उस समय भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे, लेकिन ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह फेल होती जा रही है। सवाल यह है कि
स्कूलों में शिक्षक क्या कर रहे हैं?
बच्चों को पढ़ाई के बजाय ऐसी गतिविधियों में क्यों उलझाया जा रहा है?
निरीक्षण और अनुशासन की जिम्मेदारी किसकी है?
जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष कमलेश तेकाम ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करा कर तुरंत कार्रवाई हो ताकि बच्चों का भविष्य उज्जवल हो यह सिर्फ वायरल वीडियो का मामला नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में तुरंत सुधार करने का संकेत है।
सहायक आयुक्त मंडला श्रीमती वंदना गुप्ता ने कहा है कि मामले में जांच समिति गठित कर दी गई है रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी
यह भी पढ़ें जब शिक्षक पढ़ाने लगा तुम तो ठहरे परदेसी

Aditya Kinkar Pandey is a Since completing his formal education in journalism in 2008, he has built for delivering in-depth and accurate news coverage. With a passion for uncovering the truth, Aditya has become bring clarity and insight to complex stories. work continues to investigative journalism.