मंडला की ऋतिका हर सांस के लिए लड़ रही जंग

मंडला की ऋतिका सिस्टिक फाइब्रोसिस नामक गंभीर फेफड़े की बीमारी से पीड़ित है और इस समय ऑक्सीजन सपोर्ट पर अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उसे मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर चंडीगढ़ रेफर किया है। इसे हर सांस के लिए जंग लड़नी पड़ रही है।

मंडला जिले के विकासखंड मवई के ग्राम घुटास की रहने वाली मासूम जिसने अभी जीवन को ठीक से जाना भी नही वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। बीते दो सप्ताह से वह आक्सीजन सपोर्ट पर है।

छः वर्ष पहले सिर से छिना पिता का साया

श्रतिका दस वर्ष की थी तब पिता मुन्ना लाल यादव का वर्ष 2020 में आकस्मिक निधन हो गया था। पिता के साए के बिना पली इस बेटी की मां तारेश यादव पिछले छह वर्षों से बेटी के इलाज के लिए लगातार जूझ रही हैं।  दिसंबर 2025 में रितिका का इलाज  एम्स  नागपुर में चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज नागपुर में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। 26 जनवरी को रितिका को ऑक्सीजन सपोर्ट पर कटरा हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों ने अब रितिका को बेहतर उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया है।


परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर होने के बावजूद मां तारेश यादव ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार हर संभव प्रयास किया,। बच्ची का उपचार बीते वर्षों में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से होता रहा, लेकिन दूसरे राज्य में इलाज के दौरान योजना का पूरा लाभ नहीं मिल सका। यात्रा खर्च, महंगी दवाइयां और लंबा उपचार अब परिवार के लिए असंभव होता जा रहा है।

कटरा अस्पताल की डाक्टर मीजी पीजे का कहना है कि बच्ची बिना आक्सीजन मदद के सांस नहीं ले पा रही है बीते दो सप्ताह से उसे अस्पताल में रखा हुआ है इस बीमारी का इलाज लंग ट्रांस्प्लांट है उम्मीद है कि चंडीगढ़ में बच्ची का इलाज हो जाए।

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