गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण का प्रयोग सही या ग़लत?

गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण का प्रयोग सही या ग़लत?

भारत के राष्ट्रीय पर्व सिर्फ उत्सव नहीं है संविधानिक मूल्यों और ऐतिहासिक परंपराओं का प्रतीक होते हैं। हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है,  इन दोनों अवसरों पर ध्वज फहराने की प्रक्रिया बैशक सभी को पता हो मगर ध्वजारोहण और ध्वज फहराने के प्रयोग को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है ।

गणतंत्र दिवस में सोसल मीडिया से लेकर राजनैतिक दलों के आमंत्रण पत्र में ध्वजारोहण लिखना आम बात हो चुकी है लेकिन जब शासकीय आमंत्रण पत्र में भी यही गलती की जाए तो बताना जरूरी है कि गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण नहीं होता बल्कि ध्वज फहराया जाता है। मंडला जिले के निवास में बांटे गए आमंत्रण पत्रों में ऐसे ही गलती की गई है हो सकता है जिले के अन्य स्थानों के शासकीय आमंत्रण पत्रों में यही गलती हो। भले ही यह गलती जानबूझकर नहीं की जा रही हो लेकिन कम से कम शासकीय स्थान में बैठे जिम्मेदारों से ऐसी ग़लती की अपेक्षा नहीं होती है।

ध्वजारोहण और ध्वज फहराने में क्या अंतर है ?

ध्वजारोहण का अर्थ है राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराना, जबकि ध्वज फहराने (Flag Unfurling) में ध्वज पहले से ऊपर बंधा होता है और उसे खोला जाता है।

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस): हर वर्ष अगस्त में जब राष्ट्रीय ध्वज को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराया जाता है, तो यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि एक नए राष्ट्र के उदय, संघर्ष से स्वतंत्रता तक की यात्रा और आत्मनिर्भर भारत की भावना को दर्शाता है। जबकि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस): ध्वज फहराया जाता है, क्योंकि इस दिन भारत ने अपना संविधान अपनाकर स्वयं को एक गणराज्य घोषित किया।

रिटायर इंजीनियर को सजा

This website uses cookies.